मृत्यु के बारे में उनके विचार श्पष्ट थे । उन्होंने मृत्यु को एक सहज अलविदा जैसा एक भाग कहा है । खुद को हॉस्पिटल में अपने मृत्यु का खेल आया था वहा एक चिठ्ठी लिख के रख दी थी। कहता मुझे बड़े प्यार से विदे देनी होगी ।३मार्च १९८६ को उनका देहांत हुआ था। उन्होंने संस्कृत की सेवा में बड़ा योगदान दिया था। वादोदारामे संस्कृत विद्वाद परिषद् में कार्यरत थे। उनको दी हुई शोकांजलि प्रस्तुत है।
रविवार, 10 जनवरी 2010
सोमवार, 4 जनवरी 2010
रजवाडो में सेवा
पहले मिटटी के घर थे । बचुकाका का जो घर है उसके सामने एक नीम का पेड़ रहा करता था । वहा भगवान दादा ध्यान किया करते थे । जिनकी मृत्यु उनके १०१ की उम्र में हुई थी । वहा एक भोयरा था । इंट के मकान पहले गौरीशंकर काका का बना था। उसके बाद भवानीशंकर का और उसके बाद शिवशंकर का बना था । भगवान दादा अंदाज़ इ १६९७ बड़े भक्त थे । यही अध्यात्म वृत्ति बच्चो में चली आई होगी । 



સમાજ સેવા મેં જોડાયેલા રહ્યા.તે સમય ન છાપણું પણ છે.1945 માં જ્યોતિષ નું કામ ચલાવતા તેનું લેટર પેડ છે.જે bolundara ગામ માં હતું. આજે વડોદરા છે.આજે ગેંડા સર્કલ પાસે ઈશા હોસ્પિટલ સામે છે. મ 9376214921 રા.વ્યાસ 9898563630.ધારાબેન જોશી 9898280002 મુલાકાત આપે છે.




સમાજ સેવા મેં જોડાયેલા રહ્યા.તે સમય ન છાપણું પણ છે.1945 માં જ્યોતિષ નું કામ ચલાવતા તેનું લેટર પેડ છે.જે bolundara ગામ માં હતું. આજે વડોદરા છે.આજે ગેંડા સર્કલ પાસે ઈશા હોસ્પિટલ સામે છે. મ 9376214921 રા.વ્યાસ 9898563630.ધારાબેન જોશી 9898280002 મુલાકાત આપે છે.
उनकी सेवाए सतत रही है । राज्य कार्य में ,भारत की आज़ादी के काम में ,सनातन धर्म रक्षण के काम में ,यज्ञ यागादी में, ज्योतिष में ,संस्कृत प्रचार में कहा भी । यही गुणों के लेकर उनके छोटे भाई भवानीशंकर आखिर तक विश्व हिन्दू परिषद् की सेवामे जुटे रहे ! छोटे भाई परमानंदजी सरपंच पद पे रहे और कोंग्रेस के पहेले अधिवेशन में गए थे। शिवशंकर उनके समय में इडर ,वडा गाम ,रणासण ,बोलुन्द्रा ,मोहनपुर जैसे रजवाडो में राज ज्योतिष का काम किया था। विनय सिंह जी ने तो अपने पुत्रो भिखेंद्र सिह ,दिलीप सिह को शिक्षा प्राप्ती के लिए उनके पास ही रख्खे थे !


सनातन मंडल में उस समय साबरकांठा का नाम महिकंथा था वहा उनके काम रहे है । महात्मा गाँधी को नडियाद में मिले थे। किन्तु गाँधी उनको मिलते जो कोई भी आदत को छोड़े !उनको कोई आदत ना थी किन्तु कभी भी चाय पि लेते थे । गाँधी के पास ये उन्होंने छोड़ा था ।विविध सम्प्रदायों को मिलते थे और उनके विषयो का अभ्यास करते रहते थे। क्योकि उनके मोसल में रामकबीर संप्रदाय के थे ।
बोलुन्द्रा का इतिहास है ।
इसीका भी वर्णन मिल सकता है किन्तु संक्शिप में उनका चित्र का पन्ना दिया हुआ है। बोलुन्द्रा में शिव मंदिर है । त्रम्बक्रम दादा एवं भैशंकर दादा बनारस से शिव लिंग लाये हुए थे । उन लोगो ने जुना आश्रम ,अभी के क्रुश्नास्रम में ,गाव के शिवालय में ,और अजय्भई के घर के आगे जो मंदिर है । वहा अज भी ये है। अजय भाई के घर के आगे जो शिव लिंग है वो भाई शंकर दादा का लाया हुआ था । गाव का शिवलिंग की जगह अज मंदिर बन गया है वहा हनुमान जी की मूर्ति एवं नवग्रह भी है ।
इसीका भी वर्णन मिल सकता है किन्तु संक्शिप में उनका चित्र का पन्ना दिया हुआ है। बोलुन्द्रा में शिव मंदिर है । त्रम्बक्रम दादा एवं भैशंकर दादा बनारस से शिव लिंग लाये हुए थे । उन लोगो ने जुना आश्रम ,अभी के क्रुश्नास्रम में ,गाव के शिवालय में ,और अजय्भई के घर के आगे जो मंदिर है । वहा अज भी ये है। अजय भाई के घर के आगे जो शिव लिंग है वो भाई शंकर दादा का लाया हुआ था । गाव का शिवलिंग की जगह अज मंदिर बन गया है वहा हनुमान जी की मूर्ति एवं नवग्रह भी है ।
जीवन जिम्मेदारिया

जैसे ही देश आजाद हुआ उनकी राज्ज्योतिश की जगह छूती । उन्हें आना पड़ा वड़ोदरा । उन्होंने ने जीवन में सांसारिक कष्ट सतत चालू रहा ! बचपन में पिता चल बसे । अपने चाचा पुरसोत्तम वो भी चल बसे । उनके पुत्रो भवानी,रमनलाल,(रमनलाल ने आगे चल कर बारिस्टर बने। और एक सामान्य भारतीय भी प्रेसिदंत का मुकाबला कर सकता है यह दुनिया को दिखने के लिए भारतीय प्रमुख की उम्मीद वारी की थी !)चंद्रकांत,अनंदा,मंगुबेन के साथ अपने भाई परमानन्द बहन मणिबेन सबके बड़े भाई होने से वैसे ही बापा का स्थान अहि गया था। उनकी प्रथम पत्नी तो शुरू में चल बसी जिनका नाम था गिरजा। जो कूद उसी समय में उनके साथ ज्योतिष शिख्ती थी ! दूसरी पत्नी रतिबा डो बच्ची को छोड़ के चल बसी इन्ही चीजों ने उनमे वैराग्य भावना कर दी थी। किन्तु कुदरत को कुछ और मंजूर था तो तीसरी शादी करनी पड़ी क्यों की माँ की बड़ी इच्छा थी !उनका नाम है मंगला गौरी !
वड़ोदरा में माडवी के पास आये । उस समय के संस्कृत विद्यालय ऍम अस युनिवेर्सिटी के प्रिंसिपल श्री हरी प्रसाद मेहता ने उनके कार्यालय देव ज्योतिशालय का ७द्घतन किया था। आज तो मांडवी बड़ा बस्ती वाला बन गया है ।
उनके संतान मुक्ता ,रमा ,जीतेन्द्र, राजेंद्र,निरंजना ,ज्योति ,शर्मिष्ठा ,किरीट कुमार आज भी अपने कार्यो में व्यस्त है ।
किरीट भाई की जनोई के समय का फोटो यहाँ रख्खा है .
उनके जीवन से एक बात रहती है कौटुम्बिक जिम्मेदारिया इन्सान की बाते खुलके बहर आने में समय ले लेती है
रविवार, 3 जनवरी 2010
देव ज्योतिषालय वड़ोदरा में


जगन्नाथ शास्त्री ,भाई परमानंद,भवानीशंकर,हरिशंकर ,भानाभाई भानुप्रसाद, भाई शंकर ,रणछोड़ काका इन सबको साथ लेकर यज्ञ यागादी कार्यो में खूब काम किया। कई देव प्रतिष्ठा बड़े यज्ञ भी किये ।
कभी कभी हम देखते है की इन्सान कुछ कामो से फंसा रहता है। बचपनमे पिता गवाए। उनके बरोबरी दोस्त थे चाचा परसोत्तम वो भी चल बसे। उनके संतान अपने भाई बहन सब मिलके पूरी जिम्मेदारी खुद पर रही । और कह गए बापा। खुद की भी कहानी में पहली पत्नी चल बसी विवाह्के शरुमे ! दूसरी डो बच्चे छोड़ के चल बसी और तीसरी से संसार चला तो बच्चो की संख्या बढ़ी। उसीके दौरान देशा का आजाद होना और खुदका सनातन मंडल में सेवा कार्यमे लगा रहना यह सब चला जिसमे जिम्मेदारिया आर्थिक उल्जने यह सब बना रहा ! अपने दादा के नाम देवशंकर ज्योतिषज्ञ के नाम से बनाया था देव ज्योतिषालय ! जिसका बेंगोली प्रोनॉस से देओ होता था इसीलिए इंग्लिश में DEOJYOTISHALAYA किया !!महात्मा गाँधी को मिले नडियाद में ,वहा उन्होंने चाय पीना छोड़ दिया। क्योकि गाँधी कुछ भी व्यसन छोडो तो हो बात करते थे। राजज्योतिषी होने से बड़ी अच्छी स्तिति थी फिरभी देश आजाद हुआ तो ना रहा राज ज्योतिष का पद भी और छोडके आये वड़ोदरा १९४९ में !यहाँ दिया है उस समय का कुछ पन्ना !
आज भी उनके पुत्र राजेन्द्रप्रसाद व्यास अवं पौत्री जोषी धारा वास्तु एक्स्पर्ट इसी सेवामे व्यस्त है !! पौत्र राकेश कुमार रत्नो अवं ज्वेलरी में व्यस्त है !!
आज भी उनके पुत्र राजेन्द्रप्रसाद व्यास अवं पौत्री जोषी धारा वास्तु एक्स्पर्ट इसी सेवामे व्यस्त है !! पौत्र राकेश कुमार रत्नो अवं ज्वेलरी में व्यस्त है !!
गधा है वो !!!

भाई शंकर उपाध्याय शिरस्तेदार इडर में थे। वो शिव शंकर के ससुर थे।ये भी उस ज़माने में शिरस्ते
दार थे। उनको भी ज्योतिष विषय में रस था। दावड़
में कार्यालय किया था !!

मंगलाबेन उनकी पत्नी का नाम।

दार थे। उनको भी ज्योतिष विषय में रस था। दावड़
में कार्यालय किया था !!

मंगलाबेन उनकी पत्नी का नाम।

बोलुन्द्रा में उतने पुराने समय में अपने भाई को विदेश भेजने का साहस किया था । उस भाई काना था रमण लाल जो बारिस्टर थे। एवं उन्होंने भारत के राष्ट्रपति की उम्मीदवारी श्री वि वि गिरी के सामने की थी।

शेयर बाज़ार में व्यर्थ सहसोसे उन्हों ने देखा की शयेर में लालच से इन्सान इसी खिंच जाता है। उनको यह बात ठीक ना लगी और इसकी पुकार अंतर से निकली जो उन्हेंने अपने शब्दोमे लिख दिया यह रास्ता ठीक नहीं है !! गधा है वो !!!

ज्योतिषशास्त्र एवं कर्मकांड के ज्ञान के कारण वड़ोदरा में देश आजाद होने के पश्चात् देव ज्योतिषालय को लाना पड़ा था।
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