रविवार, 3 जनवरी 2010

गधा है वो !!!







भाई शंकर उपाध्याय  शिरस्तेदार इडर  में थे। वो  शिव शंकर  के ससुर थे।ये भी उस ज़माने  में शिरस्ते
दार  थे।  उनको  भी ज्योतिष  विषय  में रस था।  दावड़
में  कार्यालय  किया था !!



मंगलाबेन  उनकी पत्नी का नाम।





बोलुन्द्रा में उतने पुराने समय में अपने भाई को विदेश भेजने का साहस  किया था । उस भाई काना था रमण लाल जो बारिस्टर थे। एवं उन्होंने भारत के राष्ट्रपति की उम्मीदवारी श्री वि वि गिरी के सामने की थी।











ज्योतिषशास्त्र एवं कर्मकांड के ज्ञान के कारण  वड़ोदरा में  देश आजाद होने के पश्चात् देव ज्योतिषालय को लाना पड़ा था।
शेयर  बाज़ार में व्यर्थ सहसोसे उन्हों ने देखा की शयेर  में लालच से इन्सान इसी  खिंच जाता है। उनको यह बात ठीक ना लगी और इसकी पुकार अंतर से निकली जो उन्हेंने अपने शब्दोमे लिख दिया यह रास्ता ठीक नहीं है !! गधा है वो !!!















भजनों की रचना



शामलाजी भगवन में अटूट श्रध्दा थी । उनका हर एकादशी वहा चलके जाना । और भजनों की रचना करते रहना। यह भजन आज भी उनके चहक गुण गुना लेते है !!
कुटुंब की प्रार्थना बड़ी मधुर है

चालु  पल  सम्भाल  जीवननी  ... यह उनका अंतिम समय में रचना थी  !!
सच्चाई का सन्मान परलोक में तो होता ही है । कवि दलपत की यह उनके संग्रह में मिली
सत्य तो यही है।



शामलाजी चलते जाते थे

शिवशंकर व्यास का बहोत बड़ा योगदान शामलाजी की पुनः प्रतिष्ठामे रहा है। इसमें योगेन्द्र मफत्लाल्जी का बड़ा सेवक काम था। गौरीशंकर व्यास और शिवशंकर મિત્ર भाई थे। और बोलुन्द्र के ब्रह्मिन बड़े प्रसिध्ध थे .


शिव शंकरजी हर एकादशी को शामलाजी चलते जाते थे.साथ बच्चो को भी ले जाते थे और कई भजन की रचना इन्होने इसी दोरान की है । उसमे परमेश का भजन उनका बड़ा प्रसिध्ध रहा है।
बोलूूंदारा से आज तो वाहन मिल जाते है ।







बुधवार, 9 दिसंबर 2009

घरडा बा


शिवशंकर के मातुश्री रुक्ष्मणि बा को सब घरडा बा हते थे! उनका अत्यन्त मातृभाव बहने वाला स्वाभाविक गुन शिव शंकर में ज्यादा खिल उठा था !!घरडा बा की बहन चकुबा  जो मासीबा कहलाती थी !! उनके पति कृष्णराम बापजी
थे !! आज भी कृष्णा श्रम बोलुन्द्रा में कार्यरत जिसे सम्हाल ते है अत्रेय  !!कृष्ण राम के तिन पुत्र गौरीशंकर
नर्मदाशंकर
गिरजाशंकर भी ज्योतिष कर्मकांड के विद्वान् थे . आज उनके नाम से हॉस्पिटल भी है !! उनके पुत्र सनातन अवं शतानन का काम है !

शुक्रवार, 8 मई 2009

बापा का अध्यात्म चिंतन

पेन्सिल में बनाया है यह उनका अध्यात्मिक चित्र है ।




समय की कठिनाई यो ने उन्हें पत्नियों का मरना एवं संतान पिता चाचा का मृत्यु इन सब ने सतत सांसारिक जिम्मेदारियों में डाला ही है । इसी कारण राज ज्योतिष पद छोड़ के वडोदरा आना हुआ । देवशंकर दादा का नम से देव ज्योतिषालय संस्था बनाई जो आज भी जिवंत है http://www.deojyotishalaya.com/


यही तो उनकी सातत्यता है । उन्होंने भूमा विद्या का जिक्र किया था। पाटण में त्रिकम लालजी  महाराज से उन्होंने यह विद्या में रस लेना शुरू किया था । इस बात का कथन त्रिकम तत्त्व विलास के ग्रन्थ के प्रारम्भ में है । और यह बात जीवन के अन्तिम समय इसी भजन को सुनाने में निकली थी !


उनका पेन्सिल  चित्र में विशेषता है !यह चित्र उनके पुत्र राजेन्द्रप्रसाद ने बनाया है।
कमाल की बात सूरज से जानिए ।सूरज थोड़ा कहता है खिड़की खुली रख्खो में प्रकाश करता हु ।