शुक्रवार, 8 मई 2009

बापा का अध्यात्म चिंतन

पेन्सिल में बनाया है यह उनका अध्यात्मिक चित्र है ।




समय की कठिनाई यो ने उन्हें पत्नियों का मरना एवं संतान पिता चाचा का मृत्यु इन सब ने सतत सांसारिक जिम्मेदारियों में डाला ही है । इसी कारण राज ज्योतिष पड़ छोड़ के वडोदरा आना हुआ । देवशंकर दादा का नम से देव ज्योतिषालय संस्था चलाई जो आज भी जिवंत है http://www.deojyotishalaya.com/


यही तो उनकी सातत्यता है । उन्होंने भूमा विद्या का जिक्र किया था। पतन में त्रिकम्लाल्जी महाराज से उन्होंने यह विद्या में रस लेना शुरू किया था । इस बात का कथन त्रिकं तत्त्व विलास के ग्रन्थ के प्रारम्भ में है । और यह बात जीवन के अन्तिम समय इसी भजन को सुनाने में निकली थी !


उनका पेन्सिल द्रोइंग चित्र में विशेषता है !यह चित्र उनके पुत्र राजेन्द्रप्रसाद ने बनाया है।